मोक्ष प्राप्ति के २० आचरण (20 rules for salvation)


1. अमानित्वं:
नम्रता, वाणी एवं व्यवहार से विनम्र होना
2.अदम्भितम:
(श्रेष्ट होने पर भी) श्रेष्ठता का अभिमान न रखना
3.अहिंसा:
किसी जीव कों पीड़ा न देना
4.क्षान्ति:
क्षमाभाव, अपमान की अवस्था में भी क्षमा करने के लिए तैयार रहना
5. आर्जव:
मन, वाणी एवं व्यव्हार में सरलता
6.आचार्योपासना:
सच्चे गुरु अथवा अध्यात्मिक आचार्य का आदर एवं निस्वार्थ सेवा
7. शौच: आतंरिक एवं बाह्य शुद्धता
सांडिल्य उपनिषद में “सौचं च द्विविधं” दो प्रकार की शुद्धता का वर्णन करता है| वाह्य शुद्धता में हमे अपने शरीर कों हर प्रकार से शुद्ध रखना चाहिए| आतंरिक शुद्धता मस्तिस्क एवं मन नो शुद्ध करके प्राप्त होती है|
8. स्थैर्य:
धर्म के मार्ग में सदा स्थिर रहना और विचलित न होना |
9.आत्मविनिग्रह:
इन्द्रियों वश में करके अंतःकरण कों शुद्ध करना(अर्थात लोभ, मोह, क्रोध, काम का त्याग करके आत्मज्ञान कों प्राप्त होना)
10. वैराग्य इन्द्रियार्थ:
लोक परलोक के सम्पूर्ण भोगों में आसक्ति न रखना |
11. अहंकारहीनता:
झूटे भौतिक उपलब्धियों का अहंकार न रखना |
12. दुःखदोषानुदर्शनम्‌:
जन्म, मृत्यु, जरा और रोग आदि में दुःख में दोषारोपण न करना
13. असक्ति:
सभी मनुष्यों से समान भाव रखना
14. अनभिष्वङ्गश:
सांसारिक रिश्तों एवं पदार्थों से मोह न रखना |
15. सम चितः :
सुख-दुःख, लाभ-हानि में समान भाव रखना |
16. अव्यभिचारिणी भक्ति :
परमात्मा में अटूट भक्ति रखना एवं सभी जीवों में ब्रम्ह के दर्शन करना |
17. विविक्तदेशसेवित्वम:
जन्मभूमि के प्रति समर्पण एवं त्याग का भाव रखना |
18. अरतिर्जनसंसदि:
निरर्थक वार्तालाप अथवा विषयों में लिप्त न होना |
19. अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं :
आध्यात्मिक ज्ञान के लिए हमेश प्रयत्नशील रहना |
20. आत्मतत्व:
आत्मा का ज्ञान होना, यह जानना की जीवन शरीर का नम नही है बल्कि शरीर के अंदर स्थित आत्मा के कारण है |